
आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
जबलपुर। कलचुरी कालीन ऐतिहासिक एवं धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र माता महालक्ष्मी धाम पचमठा मंदिर में माता महालक्ष्मी की मूर्ति खंडित किए जाने और मंदिर में चोरी की घटना के विरोध में सोमवार को अधारताल क्षेत्र में लोगों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। घटना के विरोध में घोषित अधारताल बंद का व्यापक असर देखने को मिला। क्षेत्र का अधिकांश व्यावसायिक क्षेत्र आधे दिन तक बंद रहा। श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने मंदिर परिसर से मौन जुलूस निकाला और काली पट्टी बांधकर घटना का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस-प्रशासन से वारदात में शामिल आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।

इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों के साथ सभी धर्मों के लोग शामिल हुए और धार्मिक आस्था के प्रतीक मंदिर में हुई घटना के खिलाफ एकजुट होकर शांति एवं सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया। लोगों ने कहा कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और किसी भी धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने वाली घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और लोगों ने कानून के दायरे में रहकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

मंदिर परिसर में जुटे श्रद्धालु
सोमवार को माता महालक्ष्मी धाम के पुजारी कपिल महाराज के आह्वान पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। यहां से मौन जुलूस निकाला गया, जिसमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर घटना के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। लोगों ने कहा कि जब तक घटना में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही गई है।


आधे दिन बंद रहा अधारताल का बाजार
मौन जुलूस के दौरान लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से पुलिस-प्रशासन से आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने तथा मामले में कठोर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस द्वारा क्षेत्र में पर्याप्त बल तैनात किया गया था।
घटना के विरोध में क्षेत्रवासियों और व्यापारियों द्वारा एक दिन पहले ही अधारताल बंद का आह्वान किया गया था। इसके चलते सोमवार को अधारताल के व्यावसायिक क्षेत्र में बड़ी संख्या में दुकानों के शटर बंद रहे। व्यापारियों और नागरिकों ने आधे दिन तक अपना कारोबार बंद रखकर घटना के प्रति नाराजगी जताई। बंद के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल मौजूद रहा।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि माता महालक्ष्मी धाम केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि अधारताल क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए मंदिर में हुई चोरी और मूर्ति खंडित किए जाने की घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस को आरोपियों तक जल्द पहुंचना चाहिए।
बड़ी संख्या में नागरिक हुए शामिल
मौन जुलूस और विरोध प्रदर्शन में पार्षद बाबा श्रीवास्तव, पार्षद विमल राय, पार्षद महेश राजपूत, पूर्व पार्षद सय्यद ताहिर अली, वरिष्ठ समाजसेवी दिनेश ताम्रकार, डॉ. राजेश जायसवाल, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष आसिफ इकबाल, मनीष अग्रहरि, व्यापारी संघ अध्यक्ष राकेश श्रीवास्तव, सुबोध पहारिया, अमित तिवारी, आशीष श्रीवास्तव, दीपक द्विवेदी, तपन सेन गुप्ता, आकाश रजक, परिमल चतुर्वेदी, विनय यादव, पुष्कल शर्मा, गुल्लू दुबे एवं आनंद बिहारी जायसवाल सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे। महिलाओं और युवाओं की भी जुलूस में उल्लेखनीय भागीदारी रही।
पहले भी हो चुकी है मंदिर में चोरी
उल्लेखनीय है कि अधारताल तालाब के पास स्थित प्राचीन लक्ष्मी नारायण पचमठा मंदिर में शुक्रवार देर रात चोरों ने वारदात को अंजाम दिया था। बताया गया है कि आरोपियों ने मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरों को क्षतिग्रस्त किया और इसके बाद चोरी की। चोर दानपेटी तोड़कर उसमें रखी दान राशि तथा मंदिर में चढ़े जेवर लेकर फरार हो गए। इसी दौरान माता महालक्ष्मी की मूर्ति को भी खंडित किए जाने की बात सामने आई है।
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार मंदिर में पूर्व में भी दो बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। इन्हीं घटनाओं को देखते हुए मंदिर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन चोरों ने इस बार कैमरों को ही क्षतिग्रस्त कर दिया। लगातार हो रही घटनाओं को लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
लोगों ने पुलिस से मांग की है कि मामले की गंभीरता से जांच कर जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। साथ ही मंदिर और क्षेत्र के अन्य धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



