सहारनपुर: 150 साल पुरानी मस्जिद सुबह 5 बजे गिराई, MP इकरा हसन नज़रबंद

सहारनपुर | BAZ News Network (BNN) । शनिवार सुबह 5 बजे सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में 150 साल पुरानी मस्जिद गिरा दी गई। भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में यह कार्रवाई हुई। एक दिन पहले ही कोर्ट ने प्रशासन के आदेश को सही ठहराया था। विपक्षी नेताओं ने इसे संविधान और धार्मिक आज़ादी पर हमला बताते हुए कड़ी निंदा की।
News in Short
- सहारनपुर कलेक्ट्रेट में 315 वर्ग मीटर ज़मीन पर बनी मस्जिद को शनिवार सुबह 5 बजे गिरा दिया गया
- कैराना सांसद इकरा हसन को शुक्रवार रात से घर में नज़रबंद रखा गया, सहारनपुर जाने से रोका
- ज़िला जज की अदालत ने गुरुवार को प्रशासन के आदेश को सही ठहराया था
- मस्जिद प्रबंधन के मुताबिक यह 150 साल पुरानी थी, प्रशासन ने ₹6.41 करोड़ का जुर्माना लगाया था
- मायावती और असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार की कड़ी आलोचना की
सहारनपुर मस्जिद ढहाई: भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई
शनिवार सुबह करीब 5 बजे सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद को गिराने की कार्रवाई शुरू हुई। भारी पुलिस फोर्स को तैनात किया गया था। यह मस्जिद 315 वर्ग मीटर ज़मीन पर बनी थी। प्रशासन ने इसे अवैध कब्ज़ा बताया था। जुलाई में सिटी मजिस्ट्रेट ने इसे “अनधिकृत कब्ज़ा” घोषित किया था। 30 दिन में खाली करने का आदेश दिया गया था।
प्रशासन ने कथित “अवैध कब्ज़ेदारों” पर ₹6.41 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था। यूपी पब्लिक प्रिमाइसेज़ एक्ट 1972 के तहत कार्रवाई की गई। मस्जिद प्रबंधन ने इसे चुनौती दी थी। लेकिन गुरुवार 4 सितंबर को ज़िला जज की अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी। अगले ही दिन सुबह-सुबह मस्जिद गिरा दी गई।
सांसद इकरा हसन को घर में रखा नज़रबंद
कैराना से सपा की सांसद इकरा हसन को शुक्रवार रात से उनके घर में नज़रबंद रखा गया। उनके घर के बाहर भारी संख्या में पुलिस तैनात कर दी गई। हसन सहारनपुर जाना चाहती थीं। उन्हें मस्जिद के मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना था। लेकिन उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया।
इकरा हसन ने कहा, “मेरे कैराना निवास पर रातभर भारी पुलिस फोर्स तैनात रही। मुझे नज़रबंद कर दिया गया ताकि मैं सहारनपुर न जा सकूं। मैं कलेक्ट्रेट मस्जिद के मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना चाहती थी। अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की चिंताएं रखनी थीं। लेकिन मुझे घर से बाहर ही नहीं जाने दिया गया।”
उनके पर्सनल असिस्टेंट ने बताया कि शुक्रवार रात से ही सांसद को घर में रोका गया था। घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद थे। विपक्षी नेताओं ने इस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ज़िला अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने का विकल्प था।
बजरंग दल नेता की शिकायत पर शुरू हुई थी कार्रवाई
यह पूरा मामला मार्च 2025 में शुरू हुआ था। बजरंग दल के पूर्व प्रांतीय समन्वयक विकास त्यागी ने शिकायत दी थी। राजस्व अधिकारी लेखपाल ने मस्जिद के इमाम अब्दुल हमीद के खिलाफ शिकायत दर्ज की। आरोप था कि सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा है। अप्रैल में नोटिस जारी किया गया।
मस्जिद प्रबंधन ने 11 जून को अपना जवाब दाखिल किया। मुतवल्ली तनवीर अहमद ने दावा किया कि मस्जिद करीब 150 साल पुरानी है। मुतवल्ली इस्लाम में मस्जिद का मैनेजर या संरक्षक होता है। जुलाई में सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध घोषित किया। मस्जिद प्रबंधन ने इस आदेश को चुनौती दी। लेकिन गुरुवार को ज़िला जज की अदालत ने उनकी अपील खारिज कर दी।
मायावती और ओवैसी ने की कड़ी निंदा
बसपा सुप्रीमो और पूर्व सीएम मायावती ने यूपी सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार को पूरे प्रदेश में मस्जिदों को गिराने की मुहिम “तुरंत बंद करनी चाहिए”। एक्स पर पोस्ट में उन्होंने कहा कि सरकार पूरे प्रदेश में “बड़ी जल्दबाज़ी” में मस्जिदों को अवैध घोषित कर गिरा रही है। यह सही नहीं है।
मायावती ने कहा, “संवैधानिक धर्मनिरपेक्ष सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों के लोगों का सम्मान करे। उनके धार्मिक स्थलों की रक्षा करे। हर हाल में यह संवैधानिक धर्मनिरपेक्ष सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों के अनुयायियों, उनके धार्मिक स्थलों को समान रूप से सम्मान दे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।”
एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी अब मुसलमानों पर लागू नहीं होती। उन्होंने पूछा कि क्यों सिर्फ मुस्लिम इबादतगाहों को ही निशाना बनाया जा रहा है।
सहारनपुर में सुबह 5 बजे मस्जिद गिराने की यह कार्रवाई एक बार फिर धार्मिक स्थलों को लेकर विवाद खड़ा कर गई है। विपक्ष ने इसे संविधान पर हमला बताया है। सांसद इकरा हसन को नज़रबंद रखना भी सवालों के घेरे में है। मायावती और ओवैसी जैसे नेताओं ने सरकार से तुरंत कार्रवाई रोकने की मांग की है।
📌 Sources & References
- Maktoob Media



