पैगम्बर ए इस्लाम ﷺ के संदेशों पर संगोष्ठी: अमन, इंसाफ और बराबरी को आज के समाज के लिए बताया प्रासंगिक

सद्भावना मंच की संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा—आपसी भाईचारा और इंसानियत को मजबूत करना समय की जरूरत

जबलपुर। शहर में सामाजिक सद्भाव, आपसी भाईचारे और समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सद्भावना मंच, जबलपुर द्वारा रविवार को “पैगम्बर मुहम्मद ﷺ: अमन, इंसाफ और बराबरी के अलमबरदार” विषय पर विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन 6 सितंबर को शाम 4 बजे इंडियन कॉफी हाउस, कंट्रोल रूम, घंटाघर में किया गया।
संगोष्ठी में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक विचारों से जुड़े लोगों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने पैगम्बर मुहम्मद ﷺ के जीवन और उनके संदेशों में अमन-शांति, इंसाफ, मानव समानता, महिलाओं के सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब समाज में अलग-अलग आधारों पर दूरियां और तनाव दिखाई देते हैं, ऐसे समय में इंसानियत, भाईचारे और समानता की सोच को मजबूत करना जरूरी है।

सामाजिक बुराइयों के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद ﷺ के संदेशों पर चर्चा
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता सैयद अली साहब, सेक्रेटरी, नेशनल इश्यूज़, जमात इस्लामी हिंद, हल्का मध्य प्रदेश, भोपाल ने पैगम्बर मुहम्मद ﷺ के जीवन और उनके सामाजिक संदेशों पर विस्तार से बात की। चर्चा के दौरान अरब समाज में प्रचलित कई सामाजिक कुरीतियों और उनके खिलाफ दिए गए संदेशों का उल्लेख किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि बच्चियों को जीवित दफन करने जैसी प्रथा, गुलामी और सामाजिक ऊंच-नीच जैसी व्यवस्थाओं के खिलाफ पैगम्बर मुहम्मद ﷺ ने महत्वपूर्ण संदेश दिए। इसके साथ ही मजदूरों के अधिकार, महिलाओं के सम्मान और समाज में समानता की स्थापना पर भी जोर दिया गया।
दूसरे धर्मों के महापुरुषों पर भी हों ऐसी संगोष्ठियां: सैयद अली
अध्यक्षीय भाषण में सैयद अली साहब ने सद्भावना मंच द्वारा इस तरह की संगोष्ठी आयोजित किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पैगम्बर मुहम्मद ﷺ के जीवन और संदेश पर संगोष्ठी आयोजित की गई है, उसी प्रकार दूसरे धर्मों के महापुरुषों के विचारों और उनके संदेशों पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज में मिल-जुलकर रहने और एक-दूसरे के काम आने की सोच को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने जबलपुर में शांति और सद्भाव का वातावरण बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि सद्भावना मंच का उद्देश्य सामाजिक ध्रुवीकरण को तोड़ना तथा समाज में शांति, सद्भाव और समानता का वातावरण तैयार करना है।

सभी धर्मों के ग्रंथ इंसानियत और भाईचारे की बात करते हैं: राम रतन यादव
वक्तागण में शामिल राम रतन यादव ने कहा कि पुराणों, कुरान, बाइबल और गुरु ग्रंथ साहिब सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में इंसानियत, आपसी भाईचारे और मिल-जुलकर रहने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति या सोच आपसी भाईचारे और इंसानियत को तोड़ने का काम करती है, वह अपने ही धार्मिक मूल्यों के खिलाफ काम करती है। उन्होंने समाज में धार्मिक और सामाजिक एकता को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
“संस्कारधानी की एकता को बचाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी”
घनश्याम यादव ने कहा कि जबलपुर को संस्कारधानी के रूप में जाना जाता है और यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। उन्होंने कहा कि शहर की इस सामाजिक एकता और भाईचारे को हर हाल में बनाए रखना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों के बीच विश्वास और आपसी सम्मान ही शहर की ताकत है और इसे कमजोर करने वाली किसी भी सोच से समाज को बचाना होगा।

ब्याज को लेकर पैगम्बर मुहम्मद ﷺ की शिक्षा का उल्लेख
राम राज पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि पैगम्बर मुहम्मद ﷺ दूरदर्शी थे। उन्होंने समाज के सामंजस्य को प्रभावित करने वाले विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक शोषण और समाज में असमानता पैदा करने वाले कारकों में ब्याज की भूमिका को देखते हुए पैगम्बर मुहम्मद ﷺ ने करीब 1400 वर्ष पहले ही ब्याज को हराम यानी वर्जित बताया था।
राम राज पटेल ने यह भी कहा कि व्यक्ति की कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए केवल बातें करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विचारों को व्यवहार में उतारना भी जरूरी है।
“23 साल में अरब समाज में बड़ा सामाजिक बदलाव आया”
गुलाम रसूल साहब ने कहा कि पैगम्बर मुहम्मद ﷺ ने 23 वर्षों के दौरान अरब समाज में व्यापक सामाजिक परिवर्तन का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उस दौर के समाज में मौजूद कई बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई गई और लोगों को शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी तथा इंसानियत का संदेश दिया गया।
उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के सम्मान और विरासत में उनके अधिकार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिस समाज में बच्चियों को पैदा होने के बाद दफन कर दिया जाता था, वहां महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों की बात सामने आई।
गुलाम रसूल ने समानता के संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी काले व्यक्ति को गोरे व्यक्ति पर और किसी एक देश को दूसरे देश पर श्रेष्ठता प्राप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि इंसान की असली श्रेष्ठता उसके अच्छे आचरण और ईश्वर के प्रति जवाबदेही की भावना में है।
“अमन, इंसाफ और बराबरी के सिद्धांत आज भी जरूरी”: इंजीनियर प्रवीण गजभिए
इंजीनियर प्रवीण गजभिए ने कहा कि आपसी सद्भाव के माध्यम से ही भारत की तकदीर को बदला जा सकता है। उन्होंने पैगम्बर मुहम्मद ﷺ द्वारा दिए गए शांति, न्याय और बराबरी के सिद्धांतों से सहमति जताते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव और परिवर्तन के लिए ऐसे सिद्धांत महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने कहा कि जब समाज के अलग-अलग वर्ग एक-दूसरे को समझेंगे और साथ लेकर चलेंगे, तभी मजबूत और शांतिपूर्ण समाज का निर्माण संभव होगा।
शकील अहमद ने किया मंच संचालन
कार्यक्रम का मंच संचालन सद्भावना मंच के सचिव जनाब शकील अहमद ने किया। कार्यक्रम में शहर के अमनपसंद और इंसाफपसंद नागरिकों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा पत्रकारों से शामिल होने की अपील की गई थी।
सद्भावना मंच की ओर से कार्यक्रम को सफल बनाने में भोपाल से आए मुख्य वक्ता सैयद अली साहब सहित सभी सहयोगियों और उपस्थित नागरिकों का आभार व्यक्त किया गया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रमों का उद्देश्य किसी एक समुदाय तक सीमित न होकर समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद, समझ और आपसी विश्वास को मजबूत करना है।



