PFI बैन: 4 साल जेल में बंद बुज़ुर्ग मुस्लिम लीडर, मुकदमा अधर में

नई दिल्ली | BAZ News Network (BNN) । 22 सितंबर को PFI से जुड़े बुज़ुर्ग मुस्लिम लीडरों ने जेल में 4 साल पूरे कर लिए। उनमें पूर्व PFI चीफ E अबुबक्कर, वेटरन जर्नलिस्ट प्रोफेसर P कोया, पूर्व नेशनल चेयरमैन OMA सलाम और पूर्व वाइस चेयरमैन E.M अब्दुल रहीमान शामिल हैं। मुकदमे की सुनवाई आज भी अधर में लटकी है।
News in Short
- 22 सितंबर 2022 को NIA ने UAPA के तहत 42 मुस्लिम मर्दों को गिरफ्तार किया था
- 6 दिन बाद 27 सितंबर को केंद्र सरकार ने PFI और उससे जुड़ी संस्थाओं पर 5 साल का बैन लगाया
- 75 साल के E अबुबक्कर पार्किंसंस और कैंसर से जूझ रहे, खाना-बोलना मुश्किल
- जुलाई 2026 में स्पेशल NIA कोर्ट ने 20 आरोपियों पर आरोप तय किए
- बारामुल्ला से MP इंजीनियर राशिद ने अबुबक्कर की रिहाई की मांग की
PFI बैन के बाद 4 साल जेल में
National Investigation Agency ने 22 सितंबर 2022 को देशभर में PFI पर कार्रवाई की। Unlawful Activities Prevention Act के तहत 42 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके छह दिन बाद यूनियन सरकार ने PFI और इससे जुड़ी तमाम संस्थाओं को ‘गैरकानूनी संगठन’ घोषित करते हुए 5 साल का बैन लगा दिया।
बैन में Campus Front of India, Rehab India Foundation, All India Imams Council, NCHRO, National Women’s Front, Junior Front, Empower India Foundation और Rehab Foundation Kerala का नाम शामिल था। FIR IPC की धारा 120B और 153A के साथ UAPA की धारा 17, 18, 18B, 20, 22B, 38 और 39 के तहत दर्ज हुई।
कुछ राज्य और स्थानीय लीडरों को जमानत मिली। बाकी गिरफ्तार लीडर, जिनमें बुज़ुर्ग भी शामिल हैं, 4 साल से जेल में बंद हैं।
अबुबक्कर की बिगड़ती सेहत………
जुलाई 2026 में दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट्स की स्पेशल NIA कोर्ट ने PFI और इसके 20 ऑफिस बियरर्स पर औपचारिक तौर पर आरोप तय किए। स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत हैं। तमाम आरोपियों ने आरोप नकारे और ट्रायल की मांग की।
आरोपों में सरकार के खिलाफ जंग छेड़ना, आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाना, आतंकी कैंप चलाना और लोगों को आतंकी गतिविधियों के लिए भर्ती करने की साजिश शामिल है।
अगस्त में तिहाड़ जेल में बंद बारामुल्ला से निर्दलीय सांसद इंजीनियर राशिद ने संसद सदस्यों से 75 साल के E अबुबक्कर की बिना शर्त रिहाई की अपील की। 21 अगस्त की हस्तलिखित चिट्ठी में राशिद ने बताया कि अबुबक्कर पार्किंसंस बीमारी से जूझ रहे हैं और कैंसर की सर्जरी करा चुके हैं। अबुबक्कर ठीक से खा, बोल, सुन या लिख नहीं पा रहे।
राशिद ने कहा कि अबुबक्कर की हालत देखकर उन्हें Father Stan Swamy की याद आती है। 84 साल के जेसुइट पादरी और ट्राइबल राइट्स एक्टिविस्ट स्टेन स्वामी भीमा कोरेगांव-एलगार परिषद केस में जुलाई 2021 में हिरासत में ही चल बसे थे।
E अबुबक्कर के बेटे अमल तहसीन ने Facebook पोस्ट में लिखा — “ये 4 साल सिर्फ हमारे परिवार की कहानी नहीं।” उन्होंने याद किया कि पूर्व PFI चेयरमैन OMA सलाम को बेटी की एक्सीडेंट में मौत के बाद अंतरिम जमानत मिली थी और उन्होंने बेटी की नमाज-ए-जनाज़ा पढ़ाई थी।
तहसीन ने लिखा कि कोर्ट में कुछ कैदी लीडरों को उम्र और बीमारी से जूझते देखना तकलीफदेह है। लेकिन परिवार उनकी वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ रहे और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा बनाए हुए हैं।
📌 Sources & References
- Maktoob Media
- NIA Court records



