UP की बेटी साबा हैदर बनीं अमेरिका की इलिनॉय विधानसभा में पहली दक्षिण एशियाई महिला

शिकागो | BAZ News Network (BNN) । उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर से निकली साबा हैदर ने अमेरिकी राजनीति में इतिहास रच दिया। 3 नवंबर को हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में उन्होंने इलिनॉय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की 84वीं सीट जीती। वो इलिनॉय की जनरल असेंबली में चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई महिला बन गई हैं।
News in Short
- डेमोक्रेट पार्टी की साबा हैदर ने 20,756 वोट (70.9%) हासिल कर रिपब्लिकन ब्रायन स्कोपा को हराया
- गाज़ियाबाद में पली-बढ़ी साबा ने AMU से वाइल्डलाइफ साइंस में एमएससी की और गोल्ड मेडल जीता
- 2006 में शादी के बाद अमेरिका आईं, नेपरविल इलाके में पिछले 18 साल से रह रही हैं
- इससे पहले डुपेज काउंटी बोर्ड में काम कर चुकी हैं
- बुलंदशहर के औरंगाबाद कस्बे से ताल्लुक रखने वाले परिवार की बेटी ने अमेरिकी राजनीति में UP का नाम रोशन किया
70% वोट से दर्ज की शानदार जीत
साबा हैदर ने इलिनॉय की 84वीं सीट पर रिपब्लिकन उम्मीदवार ब्रायन स्कोपा को बड़े अंतर से शिकस्त दी। उन्हें 20,756 वोट मिले जो कुल वोटों का 70.9% था। स्कोपा को सिर्फ 8,520 वोट (29.1%) मिले। यह सीट विल, डुपेज, केन और केंडल काउंटी के हिस्सों को कवर करती है। इसमें ऑरोरा, नेपरविल, ओस्वेगो, मोंटगोमरी और बोल्डर हिल जैसे इलाके शामिल हैं।
जीत के बाद साबा ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमने कर दिखाया! पिछले 15 महीने से हम जिला 84 के हर कोने में मतदाताओं से मिले। उनकी परेशानियां सुनीं, उनकी उम्मीदें समझीं। यह जीत जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा है।” उन्होंने परिवार, वॉलंटियर्स और वोटर्स का शुक्रिया अदा किया।
गाज़ियाबाद से इलिनॉय तक का सफर
साबा हैदर का परिवार मूल रूप से बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद कस्बे से है। उनके वालिद सैयद अली हैदर नौकरी के सिलसिले में गाज़ियाबाद शिफ्ट हो गए थे। साबा ने होली चाइल्ड स्कूल से पढ़ाई की। राम चमेली छाबड़ा विश्वास गर्ल्स कॉलेज से BSc टॉप करके पास किया।
इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से वाइल्डलाइफ साइंस में एमएससी किया और गोल्ड मेडल हासिल किया। AMU में रहते हुए उन्होंने वन्यजीव जनगणना में भी हिस्सा लिया। 2006 में कंप्यूटर साइंस इंजीनियर अली काज़मी से शादी के बाद वो अमेरिका चली गईं। अब नेपरविल इलाके में करीब दो दशक से रह रही हैं। उनके दो बच्चे हैं।
पहले से था सामुदायिक काम का अनुभव
विधानसभा की सीट जीतने से पहले साबा डुपेज काउंटी बोर्ड में काम कर चुकी हैं। उन्होंने सिविक ग्रुप्स, पेरेंट-टीचर एसोसिएशन, इंटरफेथ पहल और डेमोक्रेटिक पार्टी के आउटरीच प्रोग्राम में सक्रिय रहीं। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था, “मैं खुद वर्किंग फैमिली से आती हूं। मैं जानती हूं कि आम परिवारों को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। स्प्रिंगफील्ड (इलिनॉय की राजधानी) में मैं लोगों की आवाज़ बनूंगी।”
उनके वालिद सैयद अली हैदर ने गाज़ियाबाद से Clarion India को बताया, “यह सिर्फ हमारे परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। UP के एक छोटे शहर की बेटी ने दिखा दिया कि तालीम और मेहनत से क्या हासिल किया जा सकता है।”
AMU नेटवर्क ने साबा हैदर की इलिनॉय विधानसभा में जीत को यूनिवर्सिटी कम्युनिटी के लिए गर्व का पल बताया। यह जीत सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि छोटे शहरों की लड़कियों के सपनों की जीत है जो दुनिया के किसी भी कोने में अपना मुकाम हासिल कर सकती हैं।
📌 Sources & References
- Maktoob Media
- Clarion India



