Bhopal

“यह देश था, यह देश है, यह देश रहेगा…” इमरान प्रतापगढ़ी ने भोपाल में दिया मोहब्बत और एकता का पैगाम

भोपाल में आयोजित मुशायरे में देश की गंगा-जमुनी तहजीब, मोहब्बत और मौजूदा हालात पर पढ़े शेर; देर रात तक शायरी का दौर चला

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय अर्जुन सिंह की याद में भोपाल में एक भव्य मुशायरे का आयोजन किया गया। मौलाना आजाद सेंट्रल लाइब्रेरी के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद और मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी मुख्य रूप से शामिल हुए। मुशायरे में शहर के साहित्यप्रेमियों और बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। कार्यक्रम में देश की गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक सौहार्द, मोहब्बत, संविधान और मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक हालात से जुड़े शेरों ने खूब दाद बटोरी।

इमरान प्रतापगढ़ी का स्वागत करते जबलपुर के इस्लाहुद्दीन अंसारी

कार्यक्रम में इमरान प्रतापगढ़ी ने स्वर्गीय अर्जुन सिंह को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए कहा कि वह उन्हें सिर्फ इसलिए याद करने नहीं आए हैं कि वे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के बड़े राजनीतिक नेता रहे, बल्कि इसलिए भी कि जिस कांग्रेस माइनॉरिटी डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी आज उनके पास है, कभी अर्जुन सिंह भी उसकी अध्यक्षता कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की विरासत राहुल भैया के हाथों में है और अर्जुन सिंह की एक विरासत का हिस्सा उनके पास भी है, जिसे वह देशभर में आगे लेकर जा रहे हैं।

विज्ञापन

‘करोड़ों में कोई बस एक ही अर्जुन निकलता है’

इमरान प्रतापगढ़ी ने अर्जुन सिंह को याद करते हुए कहा कि भोपाल में उनकी याद में हर साल मुशायरा आयोजित होता रहा है। पिछले कुछ वर्षों से यहां आने का मौका नहीं मिल पाया था, लेकिन इस बार उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होना जरूरी समझा। उन्होंने अर्जुन सिंह को समर्पित शेर पढ़ते हुए कहा—

‘सियासत बहुत से आते-जाते रहते हैं,
करोड़ों में कोई बस एक ही अर्जुन निकलता है।’

इस शेर पर महफिल में जमकर तालियां बजीं। उन्होंने आयोजन के लिए राहुल भैया, महेंद्र चौहान और आरिफ मसूद का शुक्रिया अदा किया।

शायरी में मौजूदा हालात पर भी उठाए सवाल

मुशायरे के दौरान इमरान प्रतापगढ़ी ने अपनी शायरी के जरिए मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालात पर भी बात रखी। उन्होंने सत्ता, लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और आम जनता की आवाज से जुड़े कई शेर सुनाए।

उन्होंने पढ़ा—

‘बारिशों से क्या डरना, आंधियों से क्या डरना,
बस खुदा से डरना है, हाकिमों से क्या डरना।’

इसी क्रम में उन्होंने कहा—

‘चोर निर्धन ही बस नहीं होते,
धन तो धनवान भी चुराते हैं।
हम तो मतदान चोर समझे थे,
आप तो दान भी चुराते हैं।’

उनके इन शेरों पर श्रोताओं ने खूब दाद दी। उन्होंने अपने अंदाज में श्रोताओं को मुशायरे से जोड़े रखा और कई मौकों पर उनसे अपनी शायरी को देशभर तक पहुंचाने की अपील भी की।

‘यह देश था, यह देश है, यह देश रहेगा’

मुशायरे का एक खास हिस्सा देश की एकता और गंगा-जमुनी तहजीब को समर्पित रहा। इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि अर्जुन सिंह और पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र जिस हिंदुस्तान का ख्वाब देखते थे, उसकी झलक इस तरह के आयोजनों में दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि इलाहाबाद में गंगा और जमुना का संगम होता है, लेकिन आज की रात जिसे तहजीब और साहित्य का संगम देखना हो, वह भोपाल के मौलाना आजाद सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में देख सकता है।

इसके बाद उन्होंने अपनी नज्म के जरिए हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों के बीच एकता का संदेश दिया। उन्होंने पढ़ा—

‘सदियों से आबाद रहा है, सदियों तलक आबाद रहेगा,
भारत जिंदाबाद रहा है, भारत जिंदाबाद रहेगा।’

नज्म में उन्होंने कहा कि नफरत के अंधेरे में सभी समुदायों को एकजुट होकर खड़ा होना होगा। उन्होंने भगत सिंह और टीपू सुल्तान का जिक्र करते हुए देश के लिए कुर्बानी देने की भावना को भी शायरी में पिरोया।

मस्जिदों और बुलडोजर कार्रवाई पर पढ़े शेर

कार्यक्रम में इमरान प्रतापगढ़ी ने धार्मिक स्थलों, बुलडोजर कार्रवाई और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात शायरी के जरिए रखी।

उन्होंने कहा—

‘काश ये बात हुकूमत की समझ में आती,
मस्जिदें टूटीं तो इस्लाम नहीं टूटेगा।’

इस शेर पर मैदान में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं और दाद दी।

बुलडोजर कार्रवाई के संदर्भ में उन्होंने कहा—

‘उन्हें बुलडोजरों के बाजुओं पर नाज है,
लेकिन हमारा फर्ज है हम बेघरों के घर बनाते हैं।’

उन्होंने एक अन्य शेर के जरिए देश में मुस्लिम समुदाय के योगदान का जिक्र करते हुए कहा—

‘ये किसने कह दिया तुमसे कि बस पंक्चर बनाते हैं,
वतन पे हंस के जो कट जाएं ऐसे सर बनाते हैं।’

‘जमुना का किनारा अपना है, हर एक नजारा अपना है’

इमरान प्रतापगढ़ी ने अपनी नज्म में देश की ऐतिहासिक विरासत और मुस्लिम समुदाय के योगदान को भी याद किया। उन्होंने लोगों से संविधान, लोकतंत्र और देश की साझी विरासत पर भरोसा बनाए रखने की बात कही।

उन्होंने पढ़ा—

‘जमुना का किनारा अपना है,
हर एक नजारा अपना है।
वो भूलभुलैया अपनी है,
वो कुतुब मीनारा अपना है।
टुकड़े-टुकड़े की मत सोचो,
सारा का सारा अपना है।’

उन्होंने लाल किले का जिक्र करते हुए कहा कि 15 अगस्त का लाल किला भी सबका है। उनकी लाल किले को समर्पित नज्म पर भी श्रोताओं ने खूब दाद दी।

पिता के नाम नज्म ने माहौल को किया भावुक

राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर शायरी के बीच इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने वालिद के नाम एक भावुक नज्म भी पेश की। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों उन्हें अपने पिता के साथ लगातार तीन दिन बिताने का मौका मिला। इस दौरान हुई बातचीत ने उन्हें पिता के रिश्ते और उनके अनकहे एहसासों पर नज्म लिखने के लिए प्रेरित किया।

नज्म के शुरुआती शेर थे—

‘फूल खुशबू धनक कहकशां के लिए,
कितनी नज्में लिखीं हमने मां के लिए।
अब भला क्या लिखा जाएगा आप पर,
कोई लिख ना सका आज तक बाप पर।’

इसके बाद उन्होंने पिता की उंगलियों, उम्र के साथ चेहरे पर उभरी झुर्रियों और पिता के खामोश प्यार को शब्दों में पिरोया। उन्होंने कहा कि पिता अक्सर फोन पर सिर्फ दो सवाल पूछते हैं- कैसे हो और क्या कर रहे हो, लेकिन उनके पीछे कई अनकही बातें छिपी होती हैं। इस नज्म के दौरान उन्होंने श्रोताओं से तालियों के बजाय खामोशी से सुनने की अपील की।

जबलपुर के कांग्रेस नेताओं ने किया स्वागत

भोपाल में आयोजित इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में गांधीवादी लेखक एवं विचारक इस्लाहुद्दीन अंसारी के नेतृत्व में टीम इमरान प्रतापगढ़ी ने राज्यसभा सांसद और मशहूर शायर इमरान प्रतापगढ़ी का स्वागत किया। इस दौरान कांग्रेस नेता आजम अली खान, तारे कंसारी सहित जबलपुर के कई कांग्रेस नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

देर रात तक चला शायरी का दौर

कार्यक्रम में इमरान प्रतापगढ़ी ने ताजमहल, लाल किला, देश की साझी विरासत और सामाजिक सौहार्द पर भी अपनी नज्में सुनाईं। उन्होंने कहा कि देश को बांटने के बजाय उसकी साझी संस्कृति और इतिहास को समझने की जरूरत है।

मुशायरे में अन्य शायरों ने भी अपने कलाम पेश किए। इमरान प्रतापगढ़ी ने अंजुम रहबर, विजय तिवारी, आदित्य जैन, खुशबू, शाहिद अंजुम और अन्य शायरों की प्रस्तुतियों का जिक्र करते हुए उनकी सराहना की। कार्यक्रम की निजामत नदीम फर्रुख ने की।

मुशायरे के समापन पर इमरान प्रतापगढ़ी ने राहुल भैया, महेंद्र चौहान, आरिफ मसूद और पूरी आयोजन टीम को शानदार आयोजन के लिए मुबारकबाद दी। उन्होंने अर्जुन सिंह के साथ-साथ भोपाल की दिवंगत शख्सियतों अय्यूब भाई, मशहूर कव्वाल कय्यूम भाई, समाजसेवी लल्लू भाई मछली और शफीक भाई को भी खिराज-ए-अकीदत पेश किया। साथ ही पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र को भी याद किया।

देर रात करीब ढाई बजे तक चले इस मुशायरे का समापन इमरान प्रतापगढ़ी के इन शेरों के साथ हुआ—

‘अपनी सांसों में आबाद रखना मुझे,
मैं रहूं ना रहूं याद रखना मुझे।’

Back to top button

You cannot copy content of this page