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जबलपुर में आवारा कुत्तों का आतंक: 3 साल की मासूम प्राची को नोचा, 6 माह की बच्ची को जबड़े में दबाकर भागा — दोनों बहनों की हालत गंभीर, प्रशासन पर उठे सवाल

जबलपुर आगासौद आवारा कुत्ता हमला

घटनास्थल आगासौद, पाटन — जबलपुर 

जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर में आवारा कुत्तों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रहे कुत्तों के हमले अब मासूम बच्चों की जान के लिए खतरा बन गए हैं। ताजा और सबसे दर्दनाक मामला जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम आगासौद से सामने आया है, जहां एक आवारा कुत्ते ने एक ही परिवार की दो सगी मासूम बहनों पर खूनी हमला कर दिया। 3 वर्षीय प्राची को आंगन में बुरी तरह नोचा, और जब मां बचाने दौड़ी तो वही कुत्ता घर के अंदर घुस गया और जमीन पर सो रही 6 माह की शिशु को जबड़े में दबोचकर भाग निकला। पड़ोसियों की मदद से छोटी बच्ची को बचाया गया, लेकिन दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।

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😱 घटना का पूरा विवरण — एक के बाद एक दो हमले

आगासौद निवासी नरेश भवेदी और उनकी पत्नी सुलोचना भवेदी दिहाड़ी मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। गांव में ही एक किसान ने उन्हें अपने खेत में बना मकान रहने के लिए दिया हुआ है। घटना के दिन नरेश काम के सिलसिले में बाहर गए हुए थे। घर पर केवल सुलोचना और उनकी दोनों बेटियां थीं।

सुलोचना घर के अंदर काम कर रही थीं, जबकि उनकी 3 वर्षीय बड़ी बेटी प्राची घर के आंगन में खेल रही थी। तभी अचानक एक आवारा कुत्ते ने प्राची पर झपट्टा मारा और उसे बुरी तरह नोचना शुरू कर दिया। बच्ची की तेज चीख सुनकर मां सुलोचना हाथ में लाठी लेकर बाहर दौड़ी और किसी तरह कुत्ते को भगाकर बड़ी बेटी को उसके चंगुल से छुड़ाया। लेकिन तब तक कुत्ता प्राची के चेहरे और शरीर को बुरी तरह नोच चुका था।

यहीं नहीं रुका यह खूनी सिलसिला। बड़ी बेटी को छोड़कर वही कुत्ता घर के अंदर घुस गया, जहां 6 माह की छोटी शिशु जमीन पर निर्दोष नींद में सो रही थी। कुत्ते ने उस पर भी हमला किया और उसे जबड़े में दबोचकर भागने लगा। सुलोचना की चीख-पुकार सुनकर आसपास के पड़ोसी दौड़े आए और मिलकर कुत्ते को खदेड़ा। तब जाकर छोटी बच्ची को उसके जबड़े से मुक्त कराया जा सका।

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🏥 पाटन अस्पताल में प्राथमिक उपचार, फिर जबलपुर रेफर

दोनों बच्चियों के शरीर पर कुत्ते के काटने के गहरे और गंभीर घाव थे। परिजन तत्काल दोनों को लेकर पाटन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन दोनों की हालत को गंभीर देखते हुए उन्हें जबलपुर के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन और क्षेत्रीय नागरिकों की मदद से दोनों बच्चियों को जबलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

मां सुलोचना ने बताया कि डॉक्टरों ने बड़ी बेटी प्राची के चेहरे की सर्जरी की आवश्यकता बताई है, क्योंकि चेहरे पर चोटें बेहद गहरी हैं। क्षेत्रीय नागरिकों ने मदद के लिए हाथ बढ़ाया और अस्पताल में भर्ती करवाने में सहयोग किया।

📋 घटना का सारांश:
🔴 घटनास्थल: ग्राम आगासौद, पाटन, जिला जबलपुर
🔴 पीड़ित: प्राची (3 वर्ष) एवं 6 माह की शिशु — दोनों सगी बहनें
🔴 माता-पिता: नरेश भवेदी व सुलोचना भवेदी (दिहाड़ी मजदूर)
🔴 उपचार: पाटन स्वास्थ्य केंद्र → जबलपुर निजी अस्पताल
🔴 स्थिति: दोनों की हालत गंभीर, प्राची को सर्जरी की जरूरत

🐕 जबलपुर में आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक — एक गहरी समस्या

यह घटना कोई अकेली नहीं है। जबलपुर शहर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में आवारा कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। हर महीने दर्जनों लोग — खासकर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं — इन हमलों का शिकार होते हैं। सुबह-शाम सड़कों पर, मोहल्लों में, गलियों में और अब तो घरों के अंदर तक आवारा कुत्ते घुस आ रहे हैं।

नगर निगम और ग्रामीण प्रशासन द्वारा समय-समय पर एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम चलाए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आवारा कुत्तों की संख्या में कोई उल्लेखनीय कमी नहीं आई है। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर ये कार्यक्रम कहां तक प्रभावी हो रहे हैं?


😤 प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

आगासौद की इस दर्दनाक घटना के बाद एक बार फिर स्थानीय प्रशासन और नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि:

  • आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण अभियान महज कागजों तक सीमित हैं।
  • पकड़े गए कुत्तों को उचित प्रबंधन के बिना वापस उसी इलाके में छोड़ दिया जाता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में डॉग स्क्वाड की कोई सक्रिय उपस्थिति नहीं है।
  • पीड़ित परिवारों को न तो मुआवजा मिलता है, न ही समुचित सहायता।

💔 गरीब परिवार पर दोहरी मार — इलाज का खर्च कैसे उठाएं?

नरेश और सुलोचना भवेदी का परिवार पहले से ही आर्थिक संकट में जी रहा है। दिहाड़ी मजदूरी से मुश्किल से दो वक्त का खाना जुटाने वाले इस परिवार पर अब दोनों बेटियों की गंभीर चोट, भर्ती और संभावित सर्जरी का भारी खर्च आ गया है। निजी अस्पताल में इलाज की लागत इनकी क्षमता से कहीं बाहर है।

क्षेत्रीय नागरिकों ने आगे आकर अभी तक मदद की है, लेकिन प्रशासन से मांग की जा रही है कि पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता और मुआवजा तत्काल दिया जाए।

📢 मांगें जो उठ रही हैं:
✅ पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता
✅ पाटन और आगासौद क्षेत्र में आवारा कुत्तों को पकड़ने का अभियान
✅ जबलपुर जिले में डॉग स्क्वाड को सक्रिय किया जाए
✅ ग्रामीण इलाकों में भी ABC कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू हो
✅ कुत्ते के काटने के बाद एंटी-रेबीज इंजेक्शन मुफ्त और सुलभ हो

 

जबलपुर के आगासौद में दो मासूम बहनों पर हुआ यह क्रूर हमला केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है। जब तक आवारा कुत्तों की समस्या का ठोस और दीर्घकालिक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक ऐसे दर्दनाक हादसे होते रहेंगे। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मुद्दे को प्राथमिकता दे और ठोस एवं जमीनी कार्रवाई करे — नहीं तो अगली बार की कीमत किसी और मासूम को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।

— रिपोर्ट: BazMedia.in, जबलपुर |  19 मई 2026

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